Gautam Buddha Biography in Hindi | गौतम बुद्ध कि जीवनी

 नमस्कार मित्रों 10 lines में आपका स्वागत है आज हम आपको Gautam Buddha Biography in Hindi, 10 Lines on Gautam Buddha in Hindi, गौतम बुद्ध का जीवन परिचय, गौतम बुद्ध की जीवनी, गौतम बुद्ध जीवनी, buddha biography in hindi, mahatma buddha biography in hindi, bhagwan buddha biography in hindi गौतम बुध की जीवनी के बारे में बताएँगे इस पोस्ट से आपकी जानकारी बहुत ज्यादा बढ़ने वाली है

भारत एक मात्र ऐसा देश है जहाँ विभिन्न धर्मों को मानने वाले लोग एक साथ रहते हैं. जिसमें बौद्ध धर्म को  मानने वाले भी हैं  बौद्ध धर्म एक पुराना भारतीय धर्म है  और दुनिया के प्रमुख धर्मों में से एक है. ऐसा माना जाता है कई बुध धर्म कई स्थापना 2600 वर्ष पूर्व भगवान बुद्ध की थी ज्यादातर बौद्ध धर्म को मानने वाले कोरिया, थाईलैंड, चीन, जापान, श्रीलंका, नेपाल , भूटान और भारत जैसे कई देशों में रहते हैं. इस लेख में हम biography of gautam budha के बारे में महत्वपूर्ण और रोचक जानकारी जानेंगे.

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Gautam Buddha Biography in Hindi – गौतम बुद्ध कि जीवनी

1 – जन्म और बचपन

Gautam Buddha Biography in Hindi – गौतम बुद्ध कि जीवनी: गौतम बुद्ध का जन्म लगभग 563 ईसा पूर्व में नेपाल के लुम्बिनी नगर में हुआ था। गौतम बुद्ध के पिता का नाम राजा शुद्धोधन था, राजा शुद्धोधन  इक्ष्वाकु वंशीय क्षत्रिय थे गौतम बुद्ध के माता का नाम माया देवी था। 

गौतम बुद्ध के बचपन का नाम सिद्धार्थ गौतम था सिद्धार्थ का वचपन शाक्य वंश के राजकुमार के रूप में बीता  सिद्धार्थ गौतम के जन्म के सात दिन बाद उनकी माता का निधन हो गया सिद्धार्थ गौतम का पालन पोषण महारानी की छोटी बहन सिद्धार्थ कई मौसी महाप्रजापती गौतमी ने किया था।

सिद्धार्थ की माता कोलियन वंश की राजकुमारी थी। ऐसा माना जाता है कि जब वो गर्भा अवस्था के दौरान अपने पिता के घर जा रही थी तो उन्होंने लुंबिनी ग्राम के स्थान पर बुद्ध को जन्म दिया था  मौर्य सम्राट अशोक ने इसी स्थान पर एक स्तम्भ का निर्माण कराया था जिसके उपर लिखा था यहाँ शाक्यमुनि गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था    

2 – सिद्धार्थ की शिक्षा                                              

सिद्धार्थ ने अपने गुरु विस्वामित्र से बेद,पुराण और उपनिषद की शिक्षा प्राप्त की और उसी के साथ राज काज युद्ध विद्या की शिक्षा प्राप्त की सिद्धार्थ ने तीर – कमान, घोड़े सवारी, घुड़दौड़ आदि 

3 – सिद्धार्थ गौतम का स्वभाव 

बचपन से ही सिद्धार्थ बहुत दयालु थे उनका मन दया और करुना की भावना से भरा था उनसे किसी भी प्राणी का दुःख सहन नहीं होता था। कई उदाहरणों से यह बात बिलकुल स्पष्ट भी होती है।

 कई बार घोड़ों के दौड़ में वो इसिलिय हार जाते थे क्योंकि जब घोड़े दौड़ते थे ।और घोड़ों के मुह से झाग निकलने लगता था तो घोड़ों को थका जानकर उन्हें रोक लेते थे और इस तरह वो घोड़ों कई दौड़ में हार जाते थे परन्तु घोड़े को कष्ट देकर खेल में जीतना उन्हें कतई पसंद नहीं था 

एक बार सिद्धार्थ टहल रहे थे और उसी समय किसी शिकारी के तीर से घायल हुआ हंस उंहें मिला सिद्धार्थ ने हंस उठाया तीर निकला सहलाया और पानी पिलाया उसकी सेवा की वो सोच ही रहे थे कि ये नीच कार्य किसने किया

 उसी समय उनका चचेरा भाई देवदत्त उनके पास आया और कहा हंस को तीर मैंने मारा है हंस मुझे दे दो ये मेरा शिकार है सिद्धार्थ ने देवदत्त को हंस देने से मनाकर दिया और सिद्धार्थ ने कहा कि हंस को तुमने मारा है और मैंने बचाया है मरने वाले से ज्यादा अधिकार बचाने वाले का होता है इसलिए हंस मै तुम्हे नहीं दूंगा 

जब बातों से कोई हल नहीं निकला तो देवदत्त ने इस बात की शिकायत सिद्धार्थ के पिता राजा शुदोधन से की राजा शुदोधन ने सिद्धार्थ से कहा आखिर तुम हंस देवदत्त को क्यों नहीं देते आखिर तीर उसी ने तो चलाया था इस बात पर सिद्धार्थ ने कहा आसमान में उड़ने वाले इस निरापराध हंस पर तीर चलाने का अधिकार उसे किस ने दिया इस

 हंस ने देवदत्त का क्या बिगाड़ा था जो इस तीर चला कर मारा घायल किया, किसी प्राणी के प्राण लेने का अधिकार किसने दिया उसे मुझ से इस हंस का दुःख देखा नहीं गया मैंने इसकी सेवा की है इसके प्राण बचाए है इसलिए हंस पर अधिकार मेरा होना चाहिए 

राजा शुदोधन को सिद्धार्थ कई बात बेहद पसंद आई उन्होंने कहा कि तुम्हारी बात बिलकुल सही है मरने वाले से ज्यादा बचाने वाला बड़ा होता है इसलिए हंस तुम्हारा हुआ इस हंस पर अब तुम्हारा ही हक़ है 

4 – गौतम बुद्ध का विवाह

Gautam Buddha Biography in Hindi – गौतम बुद्ध कि जीवनी: सिद्धार्थ के जन्म के बाद उनकी जन्म-पत्री तैयार करने के लिए राजा शुदोधन ने दो ज्योतिषियों को बुलाया। एक ज्योतिषी ने सिद्धार्थ के लिए यह भविष्यवाणी की कि शिशु बड़ा होकर एक महान सन्यासी बनेगा। यह संसार के भौतिक सुखों को त्याग कर सन्यास को धारण करेगा 

राजा के लिए यह भविष्यवाणी घोर चिंता का कारण बन गई और उन्होने सिद्धार्थ के पालन पोषण पर भुत ध्यान देने लगे जिससे उसका मन सांसारिक बस्तुओं में लगा रहे शुदोधन ने 16 वर्ष की आयु में सिद्धार्थ का विवाह दंडपाणि शाक्य की कन्या यशोधरा से करा दिया जिससे सिद्धार्थ की एकांत प्रियता ख़तम हो सके शादी के कुछ समय के बाद सिद्धार्थ को पुत्र कई प्राप्ति हुई जिसका नाम राहुल था 

राजा शुदोधन ने सिद्धार्थ को सांसारिक बंधनों में बंधे रहने के लिए तीन ऋतुओं के हिसाब से तीन महल बनवा दिए भोग विलास का पूरा प्रबंध करा दिये, दास, दासी सेवा में लगा दिये मनोरंजन की सभी सामग्री उपलब्ध करा दी गयी, मन बहलाने के लिए नाचने गाने वाली नृत्यांगनाओं का प्रबंध कर दिया गया परन्तु यह सब व्यर्थ  रहा सभी भोग विलास के साधन मिलकर भी सिद्धार्थ को सांसारिक बंधन में बांध कर नहीं रख पाए 

 5 – महात्मा बुद्ध का गृह त्याग

बौद्ध धर्म ग्रंथों के अनुसार ऐसा माना जाता है कि सिद्धार्थ के मस्तिष्क में सांसारिक जीवन त्यागने का विचार चार घटनाओं को देखने से आया। 

एक बार जब सिद्धार्थ राज्य में भ्रमण के लिए निकले तब उन्होंने एक वृद्ध व्यक्ति को  देखा, जो अत्यंत कमजोर था और हाथ में लिए लाठी के सहारे सड़क पर कांपते हुए बहुत धीरे-धीरे चला जा रहा था।

 दूसरी बार जब सीधा बगीचे में शहर के निकले तो सिद्धार्थ की द्रिष्टि एक रोगी पर गयी जिसकी सांसे बहुत तेज चल रही थी, और उसका पेट फुला हुआ था चेहरा एकदम पीला पड़ चूका था और वह दुसरे व्यक्ति की सहायता से  बड़ी मुश्किल से चल भी पा रहा था।

तीसरी बार सिद्धार्थ ने एक लाश (मरा हुआ व्यक्ति ) को देखा जिसे चार व्यक्ति ले जा रहे थे। और उसके परिवार के सदस्य पीछे रोते बिलखते हुए छाती पीटते जा रहे थे।

 इस  दृश्य ने सिद्धार्थ के मन पर बहुत गहरा प्रभाव डाला। उसी क्षण उनके मन में एक विचार आया कि क्या मतलब है ऐसे जीवन का जो इतने सारे कष्टों से भरा  हुआ है,

और अगली बार सिद्धार्थ ने एक सन्यासी को देखा जो जीवन के सांसारिक प्रेम,मोह माया को त्यागकर मोक्ष कि प्राप्ति के लिए प्रयत्नशील था इन सभी घटनाओं ने सिद्धार्थ के मन पर गहरा प्रभाव डाला, उनका मन बहुत अशांत हो गया। 

राजकुमार सिद्धार्थ के पास किसी वास्तु कि कोई कमी नहीं थी उनका जीवन धन धान्य, ऐश्वर्य और सुख-समृद्धि से भरा हुआ था सब कुछ होने के बाद भी सिद्धार्थ के मन को शांति प्राप्त नहीं थी 

इन सभी घटनाओं से सिद्धार्थ का ह्रदय परिवर्तित हुआ और एक रात सिद्धार्थ ने अपने सरे सुख सुबिधाओं,घर परिवार, पुत्र राहुल और पत्नी यशोधरा को सोता हुआ छोड़कर दुखमय संसार से छूटकारा पाने के लिए घर का त्याग कर दिए और परम सत्य और शान्ति  की खोज में निकल पड़े 

6 –  बुद्ध के गुरु

गौतम बुद्ध कई वर्षों तक जंगल में तपस्या के लिए भ्रमण करते रहे एक दिन गौतम बुद्ध घूमते घूमते राजगीर पहुंचे जहाँ उन्हें अलार कलाम एक सन्यासी मिले जिनसे गौतम बुद्ध ने ध्यान लगाना और तपस्या करना की शिक्षा प्राप्त की 

परन्तु उनका मन अभी भी अशांत ही रहा उसके कुछ समय उपरांत घूमते घूमते गौतम बुद्ध उत्तक रामपुत्र से मिले उनसे योग और साधना करना सीखा पहले गौतम बुद्ध कुछ अन्न जल भी साधना के साथ ग्रहण करते थे  

गौतम बुद्ध तिल और चावल सेवन कर तपस्या में लीन रहते थे परन्तु कुछ समय बाद उन्होंने अन्न जल का सेवन करना भी त्याग दिया और दिन रात ध्यानमग्न रहा करते थे जिससे उनका शारीर कमजोर हो गया था एक बार गौतम बुध ध्यानमग्न थे तभी कुछ गीत उन्हें सुनाई दिए कई किसी चीज का अति नहीं होना चाहिए 

तब गौतम बुध को यह समझ में आया कि पूरी तरह से भोजन छोड़ देने से उनका शरीर अस्वस्थ हो जाएगा और अधिक भोजन करने से उन्हें तपस्या करने में परेशानी होगी ईश्वर की अराधना करने के लिए अपने शरीर को अत्यधिक कष्‍ट पहुंचाना ठीक नहीं हैं गौतम बुद्ध ने मध्यम मार्ग को अपनाकर परम ज्ञान की प्राप्ति के लिए कठोर तपस्या करना शुरू किया.

7 – महात्मा बुद्ध को ज्ञान प्राप्ति

गौतम बुद्ध परम ज्ञान और शांति को प्राप्त करने के लिए गया के समीप ऊरविल्व के जंगलों में पहुंचे वहां गौतम बुद्ध ने 6 वर्षों तक कठोर साधना की किन्तु उन्हें तब भी ज्ञान की प्राप्ति नहीं हुई साधना के दौरान उनका शरीर बेहद कमजोर हो गया उनका शरीर नर कंकाल बन गया, मानो बिलकूल मृत्यु निकट हो

 कहा जाता है कि जंगल के समीप रहने वाले चरवाहे की बेटी सुजाता ने गौतम बुद्ध को खीर खिलाई, जिससे उनके शरीर में उर्जा का संचार हुआ फिर गौतम बुद्ध ने अत्यंत कठोर साधना का मार्ग त्यागने का निर्णय किया 

माना जाता है की 528 ईसा पूर्व पूर्णिमा की रात में 35 वर्षीय गौतम बुद्ध को पीपल के पेड़ के नीचे परम ज्ञान की प्राप्ति हुई जिस पीपल के बृक्ष के नीचे बुद्ध को परम ज्ञान कई प्राप्ति हुई थी वह पीपल का वृक्ष बोधिवृक्ष के नाम से विश्व विख्यात हुआ और गया में इस स्थान को बोधगया के नाम से जाना जाने लगा

8 – गौतम बुध की मृत्यु

माना जाता है कि लगभग 80 वर्ष की आयु में गौतम बुद्ध की मृत्यु हुई थी उस समय गौतम बुद्ध पावा नगर में थे वहां उन्होंने एक लोहार के घर भोजन किया था जिससे उन्हें पेचिश कई समस्या हुई। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में कुशीनगर पहुंचने पर उनका स्वास्थ्य बहुत अधिक बिगड़ता चला गया और अंत में उन्होंने अपने प्राणों का त्याग दिया 

परन्तु कई भारतीय विद्वानों का उनकी मृत्यु के विषय में अलग मत है कुछ विद्वानों के हिसाब से 483 ईसा पूर्व वैशाख मास की पूर्णिमा को उनकी मृत्यु मानी जाती है और कई विद्वान तो ऐतिहासिक उदाहरण सहित 487 ई  में स्वीकार करते हैं  

बौद्ध लोगों द्वारा बुद्ध के शरीर का त्याग करने की इस प्रकिया को महापरिनिर्वाण’ कहा जाता है बुद्ध मरकर भी अमरत्व को प्राप्त किये आज भी अनेक लाखो अनुयायी उन्हें भगवान के समान पूजते हैं

9. बुद्ध के विचार: Gautam Buddha Quotes in Hindi

1- गुजरा हुआ समय वापस नहीं आता, जो भी करना है तुरंत करें कल पर न टालें जो वक्त अभी गुजर गया है वह वापस नहीं आएगा।

2- जिस प्रकार मोमबत्ती बिना आग के स्वयं जलकर प्रकाश नहीं दे सकती उसी प्रकार से बिना आध्यात्मिक ज्ञान के मानव स्वयं को नहीं समझ सकता 

3- भूतकाल में न उलझो भविष्य के स्वप्न में मत खोओ वर्तमान पर ध्यान दो, यही खुश रहने का रास्ता है।

4- हर इंसान में वह समर्थ जिससे वह अपनी दुनिया की खोज स्वयं करें

 5- इंसान हर दिन नया जन्म लेता है, अपने मकसद को पूरा करने के लिए है इसलिए अपने दिन को बेकार न करें अपनेदिन की अहमियत समझे।

6- अच्छा सोचें – हम वही बनते हैं जो हम ज्यादातर समय सोचते हैं  इसलिए सकारात्मक बातें सोचे और खुश रहें।

7 – जीभ चाकू से भी तेज है जो खून निकाले बिना ही मार देती है।

 8- खुशी बांटने से खुशी कभी कम नहीं होती ठीक उसी प्रकार जैसे एक दिए से उसकी रौशनी कम किये बिना भी हजारो दिए जलाये जा सकते हैं 

9- हम अपने विचारों मन के विचारों से ही ढलते हैं, हम वही बनते हैं जो हम ज्यादातर समय सोचते हैं। मन जब पवित्र होता है, तो खुशी साये की तरह हमेशा हमारे साथ चलती है।

10- अपने उदरपूर्ति के लिए स्वयं कार्य करें, दूसरों पर बिलकुल भी निर्भर नहीं रहे।

11- एक निष्ठा हीन चरित्र हीन दोस्त से जानवर की अपेक्षा ज्यादा डर होना चाहिए क्योंकि एक जंगली जानवर सिर्फ आपके शरीर को घाव दे सकता है, लेकिन एक बुरा दोस्त आपके दिल दिमाग में घाव कर जाएगा

1२- आपको जो भी प्राप्त है उसकी तुलना किसी से न करें और ना ही अपने मन में दूसरों से ईर्ष्या करें जो दूसरों से ईर्ष्या करते हैं उन्हें मन की शांति कभी भी प्राप्त नहीं होती।

13- इन्सान की एक गलती दिमाग पर उठाए गए भारी बोझ के सामान है

14- प्रत्येक मानव को पूरा हक़ है कि वह अपनी दुनिया की खोज स्वंय करे।

15- ध्यान रहे गुजरा वक्त वापस नहीं आता।

16- जीभ एक तेज चाकू की तरह है जो बिना शरीर से खून निकाले ही मार देती है

17- अपने उद्धार के लिए स्वयं कार्य करें. दूसरों पर निर्भर नहीं रहें।

18- एक हजार व्यर्थ के शब्दों से एक शब्द बेहतर है जो मन को शांति देता  है।

19- हम वही बनते हैं जो हम ज्यादातर समय सोचते हैं इसलिए सकारात्मक बातें सोचें और हमेशा खुश रहें

20- इंसान हर दिन एक नया जन्म लेता है और हर दिन एक नए मकसद को पूरा करने के लिए है।इसलिए एक-एक दिन की अहमियत समझें।

21- याद रखें दर्द तो निश्चित है परन्तु कष्ट वैकल्पिक है।

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 10 Lines on Gautam Buddha in Hindi

1- गौतम बुद्ध का जन्म 563 ईसा पूर्व लुम्बिनी में इक्ष्वाकु वंश के राजा शुद्धोदन के यहाँ हुआ था।

2- सिद्धार्थ गौतम की माता का नाम महामाया था जिनकी मृत्यु गौतम बुद्ध के जन्म के 7 दिन बाद ही हो गयी थी

3- गौतम बुद्ध का पालन-पोषण महामाया की बहन सिद्धार्थ की मौसी महाप्रजापति गौतमी ने किया था।

4- 16 वर्ष की आयु में सिद्धार्थ का विवाह राजकुमारी यशोधरा से हुआ था विवाह के कुछ समय उपरांत उन्हें एक पुत्र की प्राप्ति हुई जिसका नाम राहुल था

5- विवाह के कुछ समय बाद, गौतम बुद्ध सांसारिक सुखों, शाही शिक्षा और परिवार को छोड़कर, दुनिया के दुखों से छुटकारा पाने के लिए दिव्य ज्ञान सत्य की खोज में जंगल की ओर चले गए।

6- गौतम बुद्ध बहुत दयालु थे। किसी भी मनुष्य या पशु या पक्षी को संकट में देखकर वे अधीर हो जाते थे।

7- सिद्धार्थ ने अपने भाई देवदत्त के तीर से घायल हुए हंस की मदद की और उसकी जान बचाई।

8- अलार कलाम गौतम बुद्ध के प्रथम गुरु थे। जबकि विश्वामित्र से उन्होंने वेद, उपनिषद और युद्ध-विद्या की शिक्षा प्राप्त की।

9- बोधगया में पीपल के पेड़ के नीचे बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी, जो बाद में बोधि वृक्ष के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

10-80 वर्ष की आयु में, महात्मा गौतम बुद्ध ने निर्वाण (मोक्ष) प्राप्त किया

  FAQ: Gautam Buddha Biography in Hindi

गौतम बुद्ध कौन थे?

गौतम बुद्ध एक महापुरुष थे जिन्होंने बौद्ध धर्म की स्थापना की थी। वे नेपाल के लुम्बिनी नगर में लुम्बिनी वनमयी क्षेत्र में 563 ईसा पूर्व में जन्मे थे। उनके पिता का नाम शुद्धोधन और माता का नाम माया था। वे सिद्धार्थ नामक एक शाक्य राजकुमार थे

गौतम बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति कब हुई ?

528 ईसा पूर्व पूर्णिमा की रात में 35 वर्षीय गौतम बुद्ध को पीपल के पेड़ के नीचे परम ज्ञान की प्राप्ति हुई जिस पीपल के बृक्ष के नीचे बुद्ध को परम ज्ञान कई प्राप्ति हुई थी वह पीपल का वृक्ष बोधिवृक्ष के नाम से विख्यात हुआ 

गौतम बुद्ध की ज्ञान की प्राप्ति की घटना को महाभिनिश्चय सम्बन्धी घटना के रूप में जाना जाता है 

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